एक दिन ऐसा भी आएगा, जो माँगा है मिल जाएगा 

पर क्या तय है कि फिर, तू कुछ और नहीं फरमाएगा ?

जो इच्छा हैं उम्मीदें हैं वो सब पूरी हो जाएं तो,

क्या फिर बस उतना पा कर तू  खुद में पूर्ण हो जाएगा ?

क्या फिर कोई नई ज़िद्द, कोई इच्छा तुझे ना सताएगी ?

क्या फिर तू संतोष कर चुप चाप सो जाएगा ?

अगर नहीं में उत्तर हो इन सारे प्रश्नों का तो, 

फिर बहुत जरुरी है खुद को यह बात पेचीदी समझाना 

जो तेरा है वो तुझको हर हाल में मिल जाएगा 

तो अधीर रहने से बेहतर है धीरज रख चलते जाना  

क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा, जो माँगा है मिल जाएगा 

पर याद रहे कि फिर उस दिन जब मन माँगा फल मिल जाएगा 

किसी नयी चीज़ों के लालच में फिर तू खुद को नहीं सताएगा 

बस विराम दे कर सारी चिंताओं के बदल को

वादा कर उस दिन फिर तू  दिल से मुस्कुराएगा

क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा, जो माँगा है मिल जाएगा 

Comments

Popular Posts