Sunday, May 24, 2020

हौसला


वक्त ने जो दावपेच चले नज़र के सामने वो सत्य है

वो सत्य है, हलाकि खोफ्नाक है, हलाकि दर्दनाक है पर सत्य है


इस सत्य को स्विकार कर, खुद मे फिर विचार कर,

रौशनी की एक किरण को मन फिर निहार कर

चल पड़े जो बेड़ियों को तोड़ तुम,

है यंकी मुम्किन दिखेगी हर डगर


यंकी नहीं किसी को जो तो ना करे वो ना सही,

मुश्किलों की रात जो ये दर्द दे वो भी सही

बुलंद कर आवाज़ को तू एक पुकार फिर लगा,

उठ खड़ा हो शेर सा तू एक दहाड़ फिर लगा

मजबूर है खुदा फिर देने को तेरी मन्नतें,

तू मन्नतों को अपने जहन मे ख्वाब सा फिर से जगा


नितदिन सुबह जब सूर्य निकले बादलों को चीर कर,

बिना थके जो चाँद मुस्कुरा रहा है रत भर

पंछी जब बिना रुके पथ को बढ़ते जा रहे,

पुष्प काँटों का आलिंगन कर के भी मुस्कुरा रहे,

जब अडिग हैं सब अपने – अपने कर्तव्य के उस मार्ग पर,

तो हौशला क्यों तेरा डगमगा रहा इस राह पर


वक्त के इस दौड़ में खुद को जो हासिल कर सके,

तोड़ के ईन बेडियों को तुम जो आगे बढ़ सके

नाम अंकित कर सकोगे फक्र की किताब पर,

पंख पसारे इस गगन मे तुम फतह जो कर सके


तो आज ही तू ठान ले, ये गाँठ मन में बाँध ले,

अब न रुकना है तुझे जब तक तू मंजिल पा ना ले

अब ना थकना है तुझे जब तक ये वक्त आजमा ना ले


Friday, April 14, 2017

Ye Halat..........

Ye dard zindgi k had se jyda badh chuke hain....
ham apni in halaton k daldal me fash chuke hain.....

Mannaton se pae the jo pyar k ristey sv..
aaj aage badh chle mai rah gai wahin kahin...

Har apno ne muh mod kar paraya kar diya h,
har sapno ne sath chhod ek naya gam diya h....

Ek swal man me puchhti hun aaj v....
kyon sath chhod kar h jate rah me apne sv?

Inshaf is khudai ka karun v to kese karun?
wo mere apne hi hain jinhone dhai ye kahar....

Isdard ko sath le mai chalti hi ja rahi hun
gam k kale badlon se ladti hi ja rahi hun....

Mushkurati hun magar wo gam av v baki h
gam chhipane k liye ab ye mizaz kafi h....

Har chehre k pichhe kuchh ankahe si bat h
har mushkuraht k pichhe ek nae zazbat h...


Thak si jati hun jb kv in badle hue halat se 
tab ktaren aashuon ki  bahti h mere aankh me

Parakh raha h aaj khud khuda v is kadar 
tarashti hun har gamon me jine ki ek nai lahar...

Wada kiya h zindgi se har na manungi kv
thak k is rah par himmat na harungi kv....

Chunotiyon se ghir gai hun aaj mai
kisse kahun ye dil k apne raj mai???

Zindgi ke is mizaz se ham thak chuke hain....
ham apni hi halaton k is daldalme fash chuke hain....

Ye dard zindgi k had se jyda badh chuke hain....
ham apni in halaton k daldal me fash chuke hain......
Be Strong

Tuesday, February 28, 2017

Inspiration

ज़िन्दगी ने जो दावपेच चले नज़र के सामने वो सत्य है....
वो सत्य है, हाँलाकि खोफ्नाक है, हाँलाकि दर्दनाक है पर सत्य है 

इस सत्य को स्विकार तू , खुद को फिर निहार तू 
उजाला आएगा अवश्य , ले फिर से एक दहाड़ तू ..
उठ खड़ा हो मुश्किलों को टाल कर ,
ले शपत मुम्किन दिखेगी हर डगर ...

ज़िन्दगी ने जो दावपेच चले नज़र के सामने वो सत्य है....
वो सत्य है, हाँलाकि खोफ्नाक है , हाँलाकि दर्दनाक है पर सत्य है ....

यंकी नहीं किसी को जो तो ना करे वो ना सही,
मुश्किलों की रात जो ना कटे तो ना सही 
बुलंद कर आवाज़ को और एक पुकार फिर लगा 
उठा ले अस्त्र सस्त्र तू एक उजाला फिर जगा 

मजबूर है खुदा फिर देने को तेरी मन्नतें 
तू मन्नतों को अपने शीने में फिर से जगा 

ज़िन्दगी ने जो दावपेच चले नज़र के सामने वो सत्य है....
वो सत्य है, हाँलाकि खोफ्नाक है , हाँलाकि दर्दनाक है पर सत्य है ....

हवा की सरसराहट जब तुझे है झकझोरती 
सुबह की इक नई किरण जब तुझे है टटोलती 
पंछी जब बिना रुके पथ को बढ़ते जा रहे 
पुष्प काँटों का आलिंगन कर के भी मुशुकुरा रहे 

जब अडिग हैं सब अपने -अपने  कर्म के उस मार्ग पर, 
तो हौशला क्यों तेरा डगमगा रहा इस राह पर 
बेड़ियों को तोड़ के आजाद करदे खुद को तू ,
यही है वक़्त जिसकी तलाश में भटका है तू...

ज़िन्दगी ने जो दावपेच चले नज़र के सामने वो सत्य है....
वो सत्य है, हाँलाकि खोफ्नाक है , हाँलाकि दर्दनाक है पर सत्य है ....

उम्मीद रख वो पल भी आएगा ज़रूर 
आँखों में  जब तेरी होगा खुशियों का नूर 
पर आज ही तू ये ठान ले, ये गाँठ  मन में बाँध ले 
अब न रुकना है तुझे  जब तक ये मंजिल पा ना ले ,
अब ना थकना है तुझे जब तक ये वक्त आजमा ना ले....

ज़िन्दगी ने जो दावपेच चले नज़र के सामने वो सत्य है....
वो सत्य है, हाँलाकि खोफ्नाक है , हाँलाकि दर्दनाक है पर सत्य है .....
Stay Positive 


Saturday, February 25, 2017

Kuchh Sawal h...

Kuchh sawal h man me jinhe mai khud me dohrati hun..
Man hi man inhe khud me suljhati hun.....

Sochti hun tmhe itna kyun chaha,
vo kon si wajah h jispe ab v jaa lutati hun..
Kuchh sawal h man me jinhe mai khud me dohrati hun..

Ab to man ne v muh mod sa liya h,
aanshuo ne v sath chhod sa diya h....

Dil to chahta h tujhse hr sawal ka jwab mangu,
wo pyar wo chaht us mohabbat ki fariyad manu....

janti hun ab tum laut kar na aaoge, 
mere pyar aur jajbaton ko ab na apnaoge....

isliye apne dil ko smjhati hun..
Kuchh sawal h man me jinhe mai khud me dohrati hun..
Man hi man inhe khud me suljhati hun.....